बोले कवि, एकता अनुशासन अपनाएं, विवेकानंद सा व्यक्तित्व बनाए
खेकड़ा में राष्ट्रीय युवा दिवस पर कवियों ने स्वामी विवेकानंद को याद किया। काव्यपाठ कर उनको श्रद्धांजली अर्पित की।

बोले कवि, एकता अनुशासन अपनाएं, विवेकानंद सा व्यक्तित्व बनाए
- कस्बे में काव्य संगोष्ठी का आयोजन
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
राष्ट्रीय युवा दिवस पर कवियों ने स्वामी विवेकानंद को याद किया। काव्यपाठ कर उनको श्रद्धांजली अर्पित की।
लोक साहित्य संस्कृति और हिंदी साहित्य भारती के तत्वावधान में कस्बे के मौहल्ला रामपुर स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर काव्य पाठ हुआ। राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप आयोजित जयंती पर कवियों ने अपनी सुंदर रचनाएं पढी। कार्यक्रम के प्रारम्भ में गजेन्द्र गजानन ने महापुरूष के जीवन प्रसंगों की जानकारी देकर स्वामी विवेकानंद को नमन किया। कहा कि उठो धरा के अमर सपूतो एक नया इतिहास रचाए, रहे हम धरा पर शीश गगन से छू जाए। एकता और अनुशासन अपनाएं और विवेकानंद सा व्यक्तित्व बनाएं। कवि कश्यप राजेश ने सुनाया, कसौटी से सदा युवजन बहकना बंद होता है, बड़ों के अनुकरण से जिंदगी में आनंद होता है, संयम से भरे जीवन का हरदम मान होता है, हिन्द के हर युवा के दिल में विवेकानंद होता है। कवि श्री नागेंद्र द्विवेदी ने सुनाया, जीवन मरण समान यहां पर कौन आदि है कौन अंत है, कौन है दुर्जन कौन संत है, निर्णय इसका बहुत कठिन है। कवि शालीवाहन ने सुनाया, भगवान का दिया हुआ कभी अल्प नहीं होता, जो टूट जाए बीच में वह संकल्प नहीं होता, परिश्रम से ही मिलती है विजय
उसका कोई विकल्प नहीं होता। कवयित्री पारूल चौधरी ने सुनाया, चिंतन करो चिंता नहीं मन में लाओ नए विचार, प्रेम भाव रखो सबसे करो सत्य को स्वीकार, आदर्श युवा बनो चरित्रवान, न करो कोई अनर्थ, यही है स्वामी विवेकानंद होने का अर्थ। कवियित्री पूनम नैन मलिक ने सुनाया, आत्मपूर्णता को आदर्श बनाओ, मानव सेवा का धर्म अपनाओ, कड़ी मेहनत और अनुशासन से क्षमता और प्रसन्नता बढ़ाओ। कवि अनिल धीमान ने सुनाया, सभी तब अपने लब खोलें, एक साथ सब मिलकर बोले, आनंद आनंद परमानन्द, जय जय श्री विवेकानंद। कवि विद्यासागर मौर्य ने सुनाया, नमन करें ऐसी सपूत को, जो भारत में जन्मे हैं, भारत का परचम लहराया, विश्व पटल पर चमके है। कवि अनोखा ने सुनाया, जो साहिल बनाये थे उसूलों के, वो साहिल ना रहे और औलाद को बनाया इतना काबिल, कि हम औलाद के काबिल ना रहे। कवि तेजपाल धामा ने सुनाया, कर्मों से आनंदित जिनके, अखिल विश्व के संत हुए, ऐसे थे पुण्य आत्मा नाम विवेकानंद हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डा. साहब सिंह ने की। संचालन कश्यप राजेश राज ने किया। श्रोता अतिथियों में अजय वीर यादव, बाबूलाल शर्मा, रविंद्र सक्सेना, रमेश चंद्र के अलावा छात्र सूर्यांश, अंकित, युग शामिल रहे। युवा प्रतिभा स्पर्श त्यागी को प्रतीक चिन्ह देखकर सम्मानित किया गया।