अभी तक कुछ इस तरह से रहा गाजियाबाद की महापौर का राजनीतिक सफ़र

तेजेश चौहान, तेजस
गाजियाबाद
पुरानी कहावत हैं कि यदि इंसान के अंदर जुनून और जज्बा भरा हो तो वह क्या नहीं कर सकता ? क्योंकि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद नगर निगम की मेयर आशा शर्मा ने एक ऐसी मिसाल पेश कर इस कहावत को सही ठहराया है। जब से वह राजनीति में आई तो एक भी चुनाव नहीं हारी।
इतना ही नहीं उन्होंने तमाम परेशानियों के बावजूद उन बुलंदियों को छू लिया। जिन बुलंदियों पर हर शख्स पहुंचना चाहता है।बहरहाल तमाम परेशानी के बाद गाजियाबाद की मौजूदा मेयर आशा शर्मा ने अपना राजनीति का सफर तय करते हुए अपने परिवार को भी भली-भांति देखा है।तमाम तरह के उत्तर चढ़ाव भी इन्होंने देखें हैं। लेकिन इन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
गाजियाबाद नगर निगम की महापौर आशा शर्मा के साथ तेजस न्यूज के सम्पादक तेजेश चौहान तेजस से एक साक्षात्कार हुआ। इस दौरान उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन से लेकर पर अभी तक के राजनीति के सफर के बारे में विस्तार से बताया। महापौर आशा शर्मा ने बताया कि शादी वर्ष 1982 में हुई थी।
शादी के बाद तक यह इच्छा जाहिर नहीं थी।कि वह राजनीति में जाएंगी।उन्होंने पति के लिए एक अच्छी पत्नी और बच्चों के लिए अच्छी मां बनने की चाहत में परिवार को ही पूरा समय दिया।इस दौरान उन्होंने दो बेटियों को भी जन्म दिया। उसके बाद वह अपने परिवार में ही व्यस्त रहने लगी। आशा शर्मा ने r.s.s. की सदस्यता भी ग्रहण की और उनकी साधारण स्वयंसेवक के तौर पर पहचान होने लगी। अचानक उन्हें लगा कि यदि वह राजनीति में आ जाएं तो वह ऐसे जनहित के कार्य करेंगी जिनकी लोगों को वाकई आवश्यकता होती है। धीरे-धीरे उन्होंने राजनीति में आने का मन बना लिया।
वह अक्सर असहाय लोगों का साथ देने लगी और लोगों के प्रति होने वाले अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने लगीं।उनके जज्बे को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें 1992 में भाजपा महिला मोर्चा कि महानगर उपाध्यक्ष चुना। उसके बाद उन्होंने लोगों की मदद करनी शुरू की और जनहित के कार्य शुरू कर दिए साथ ही उन्होंने संगठन को भी मजबूत करने का कार्य किया।उधर 2005 में गाजियाबाद नगर निगम बना तो उन्होंने पार्षद का चुनाव लड़ा जिसमें जीत हासिल की।
उसके बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा और सिर्फ राजनीति की तरफ से पूरी तरह से ध्यान देना शुरू कर दिया।लेकिन जब वह राजनीति में आईं तो उन्हें लगा कि वह अब परिवार पर कोई ध्यान नहीं दे पा रही है। इसलिए उन्होंने राजनीति छोड़ने का मन बनाया।लेकिन उनकी लगातार बढ़ती लोकप्रियता के कारण परिवार वालों ने भी साथ देना शुरू कर दिया।उसके बाद फिर से निगम के चुनाव हुए तो दोबारा से रह पार्षद चुनी गयीं। दोनों बार पार्षद के चुनाव में शानदार जीत होने के बाद पार्टी हाईकमान की तरफ से उन्हें निकाय प्रकोष्ठ की प्रदेश सदस्य बनाया गया। इतना ही नहीं लगातार बढ़ती लोकप्रियता के कारण उन्हें पार्टी और जिम्मेदारी देती हुई चली गई।
जिसके बाद उन्होंने महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री से लेकर राष्ट्रीय महिला मोर्चा की मंत्री तक की जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने बताया कि जब लगातार वह राजनीति की सीढ़ी चढ़ती चली गईं और आखिरकार वह गाजियाबाद की पांचवीं महापौर चुन ली गईं।
आशा शर्मा ने जिस दिन से राजनीति में कदम बढ़ाया और मेयर बनने तक एक भी चुनाव नहीं हारीं। अब महापौर बनने के बाद उन्होंने गाजियाबाद नगर निगम में तमाम ऐसे कार्य कराएं हैं जो काफी असंभव थे।गाजियाबाद को स्वच्छता अभियान में नंबर वन लाने में आशा शर्मा का अहम योगदान रहा है।
अब फिर से चुनाव नजदीक हैं।इस बार फिर वह टिकट की दावेदारी करेंगी।क्योंकि उन्हें पूरा विश्वास है कि जिस तरह से उन्होंने राजनीति का सफर शुरू किया और इस ओहदे तक पहुंची तो उन्होंने हर इलाके में बड़े विकास कार्य कराते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस बार भी गाजियाबाद के लोग उन्हें अपना महापौर देखना चाहते हैं।