पावर ऑफ अटॉर्नी बंद किए जाने के आदेश के बाद गाजियाबाद तहसील परिसर में अधिवक्ता और बैनामा लेखकों का 11 दिन से लगातार धरना, सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान

हाल में ही प्रदेश सरकार की मुख्य सचिव वीना कुमारी पावर ऑफ अटॉर्नी पर रोक लगा दी है। जिसे लेकर गाजियाबाद की तहसील में सभी अधिवक्ता और बैनामा लेखक धरने पर बैठे हुए हैं 11 दिन बीत जाने के बाद भी इस तरह किसी का कोई ध्यान नहीं गया है जबकि गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर से सरकार को सबसे ज्यादा समय नहीं जाता है।

पावर ऑफ अटॉर्नी बंद किए जाने के आदेश के बाद गाजियाबाद तहसील परिसर में अधिवक्ता और बैनामा लेखकों का 11 दिन से लगातार धरना, सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान
तेजेश चौहान,तेजस
गाजियाबाद
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की तहसील में अधिवक्ता और बैनामा लेखक पिछले 11 दिन से तहसील परिसर में ही धरने पर बैठे हुए हैं। यानी तहसील का कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। जिसके कारण अकेले गाजियाबाद की तहसील बंद होने से करीब 5 करोड़ रुपये प्रतिदिन के राजस्व का नुकसान सरकार को हो रहा है। जिस दिन से प्रदेश सरकार की मुख्य सचिव ने पावर ऑफ अटॉर्नी पर रोक लगाए जाने के आदेश जारी किए हैं।उसी दिन से यह धरना जारी है।

आश्चर्य की बात यह है कि आज इस धरने को 11 दिन हो चुके हैं। लेकिन अभी तक इस पूरे मामले को लेकर किसी ने कोई संज्ञान नहीं लिया है। बड़ी बात यह है कि उत्तर प्रदेश की गौतम बुध नगर और गाजियाबाद की तहसीलों से प्रदेश सरकार को करोड़ों का बड़ा राजस्व जाता है। यदि अकेले गाजियाबाद तहसील की बात की जाए तो करीब ₹5 करोड़ रुपये का राजस्व प्रतिदिन गाजियाबाद से सरकार को जाता है। इन 11 दिनों में अभी तक सरकार को करीब अकेले गाजियाबाद से करीब 55 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। यानी इसस साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है। कि सरकार को अन्य तहसीलों सभी राजस्व का प्रतिदिन कितना बड़ा नुकसान हो रहा है।

गाजियाबाद तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि जिस तरह से एकाएक प्रदेश सरकार की प्रमुख सचिव वीना कुमारी ने तुगलकी फरमान जारी करते हुए अधिवक्ताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और पावर ऑफ अटॉर्नी पर रोक लगाई गई। वह पूरी तरह से गलत है और समस्त अधिवक्ता गण इस अभद्र टिप्पणी से बेहद आहत हुए हैं।उधर जनहित में होने वाले सम्पत्ति की खरीद फरोख्त के कार्य यानी पावर ऑफ अटॉर्नी पर जो रोक लगाई गई है। वह भी संविधान के खिलाफ है। जिसके कारण तमाम अधिवक्ता और बैनामा लेखक के साथ-साथ संपत्ति की खरीद-फरोख्त करने वाले लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। 

उन्होंने बताया कि आज 11 दिन बीत चुके हैं। उसके बावजूद भी इस तरफ किसी का कोई ध्यान नहीं गया है।उन्होंने बताया कि जब किसी ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया तो अब अधिवक्ताओं ने इस पूरे मामले को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। जिसकी सुनवाई की तारीख 6 फरवरी नियत की गई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से यह तुगलकी फरमान जारी हुआ है।यह पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है।इसलिए उच्च न्यायालय पर भी पूरी तरह से भरोसा है। कि इसे गंभीरता से लेते हुए इस तुगलकी फरमान को वापस किए जाने का फैसला सुनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक यह तुगलकी फरमान वापस नहीं होता तब तक सभी तहसीलों में धरना जारी रहेगा।