नगर निगम के दावों की खुली पोल: पहली तेज बारिश में डूबा गाजियाबाद का वार्ड-51 का जी ब्लाक , घरों तक पहुंचा पानी

रात से लगातार हो रही बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। सबसे खराब हालात नगर निगम के लाइनपार क्षेत्र के वार्ड-51 के जी-ब्लॉक में देखने को मिले, जहां सड़कें, पार्क और गलियां पूरी तरह पानी में डूब गईं। पानी की निकासी नहीं होने के कारण बारिश का पानी लोगों के घरों के अंदर तक पहुंच गया, जिससे घरेलू सामान को नुकसान हुआ और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

नगर निगम के दावों की खुली पोल: पहली तेज बारिश में डूबा गाजियाबाद का वार्ड-51 का जी ब्लाक , घरों तक पहुंचा पानी

तेजस न्यूज संवाददाता 

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गाजियाबाद। बरसात से पहले गाजियाबाद नगर निगम ने शहर के नालों की व्यापक सफाई कराने और जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के बड़े-बड़े दावे किए थे। अधिकारियों का कहना था कि मानसून आने से पहले सभी प्रमुख नालों की सफाई पूरी कर ली जाएगी, जिससे बारिश का पानी बिना किसी बाधा के निकल सकेगा। लेकिन मानसून की पहली लगातार बारिश ने इन दावों की वास्तविकता सामने ला दी है।

रात से लगातार हो रही बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। सबसे खराब हालात नगर निगम के लाइनपार क्षेत्र के वार्ड-51 के जी-ब्लॉक में देखने को मिले, जहां सड़कें, पार्क और गलियां पूरी तरह पानी में डूब गईं।

पानी की निकासी नहीं होने के कारण बारिश का पानी लोगों के घरों के अंदर तक पहुंच गया, जिससे घरेलू सामान को नुकसान हुआ और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के कुछ ही घंटों में पूरा इलाका तालाब में तब्दील हो गया। सड़क और पार्क एक समान नजर आने लगे, जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो गया। कई घरों में पानी भरने से फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य घरेलू वस्तुएं भी प्रभावित हुईं।

गौरतलब है कि जिस क्षेत्र में जलभराव हुआ है, वह लाइनपार का प्रमुख और पॉश इलाका माना जाता है। यह कॉलोनी मूल रूप से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा विकसित की गई थी और वर्तमान में नगर निगम के हैंडओवर होने के बाद यहां की साफ-सफाई, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है। क्षेत्र में अधिकांश 200 गज के मकान हैं और यहां के निवासी नगर निगम को अपेक्षाकृत अधिक हाउस टैक्स भी अदा करते हैं। इसके बावजूद जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव लोगों में नाराजगी का कारण बना हुआ है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते नालों की प्रभावी सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था की गई होती तो इतनी गंभीर स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उनका आरोप है कि नगर निगम हर वर्ष मानसून से पहले सफाई अभियान चलाने और तैयारियों के दावे तो करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर दिखाई नहीं देता।

 स्थानीय लोगों का मानना है कि शहर में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान केवल नालों की सफाई से संभव नहीं है। इसके लिए वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) को भी प्राथमिकता देनी होगी। यदि नगर निगम शहर के पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर प्रभावी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करे तो एक ओर बारिश का पानी जमीन में समा सकेगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा, वहीं दूसरी ओर सड़कों और कॉलोनियों में जलभराव की समस्या भी काफी हद तक कम हो सकती है।

 यह समस्या प्रतीक ग्रुप की हाई राइज इमारत बनने के बाद से शुरू हुई है क्योंकि जो बड़ा लाल है प्रीति ग्रुप के द्वारा वह बंद कर दिया गया। इसके बाद से ही यह बड़ी समस्या शुरू हो गई है और इस क्षेत्र में गौशाला, कैला भट्टा तक का भी पानी भर जाता है। स्थिति को देखकर लगता है कि जब तक प्रतीक ग्रुप के पास वाला नाला साफ नहीं किया जाएगा तब तक यह यही स्थिति बनी रहेगी।

फिलहाल वार्ड-51 के जी-ब्लॉक के सिंगल स्टोरी और डुप्लेक्स की तस्वीरें नगर निगम की मानसून तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। स्थानीय लोग प्रशासन से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था कराने, क्षतिग्रस्त क्षेत्रों का निरीक्षण करने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए स्थायी समाधान लागू करने की मांग कर रहे हैं।