माइनर की तीन जगह पटरी टूटी, खेतों में घुसा पानी; बारिश के बीच किसानों ने खुद संभाला मोर्चा

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच क्षेत्र की फिरोजपुर माइनर मुबारिकपुर के जंगल में तीन स्थानों पर टूट गई, जिससे तेज बहाव का पानी आसपास के खेतों में घुस गया। देखते ही देखते कई खेत जलमग्न होने लगे और फसलों पर बर्बादी का खतरा मंडराने लगा। सूचना मिलते ही किसान मौके पर पहुंचे और विभाग का इंतजार करने के बजाय बारिश के बीच खुद ही टूटी पटरी की मरम्मत में जुट गए।

माइनर की तीन जगह पटरी टूटी, खेतों में घुसा पानी; बारिश के बीच किसानों ने खुद संभाला मोर्चा

माइनर की तीन जगह पटरी टूटी, खेतों में घुसा पानी; बारिश के बीच किसानों ने खुद संभाला मोर्चा
- फसलों पर मंडराया जलभराव का खतरा, किसानों ने श्रमदान कर बंद की टूटी पटरी
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच क्षेत्र की फिरोजपुर माइनर मुबारिकपुर के जंगल में तीन स्थानों पर टूट गई, जिससे तेज बहाव का पानी आसपास के खेतों में घुस गया। देखते ही देखते कई खेत जलमग्न होने लगे और फसलों पर बर्बादी का खतरा मंडराने लगा। सूचना मिलते ही किसान मौके पर पहुंचे और विभाग का इंतजार करने के बजाय बारिश के बीच खुद ही टूटी पटरी की मरम्मत में जुट गए।
फिरोजपुर माइनर पूर्वी यमुना नहर से मुबारिकपुर गांव के पास निकाली गई है। इसी माइनर से मुबारिकपुर, निरोजपुर, फिरोजपुर, नगला बड़ी और गोठरा समेत आसपास के गांवों की हजारों बीघा कृषि भूमि की सिंचाई होती है। इन दिनों नहर विभाग द्वारा माइनर में पानी छोड़ा गया है। पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही तेज बारिश के कारण माइनर में पानी का बहाव काफी बढ़ गया। बुधवार रात तेज दबाव के चलते मुबारिकपुर के जंगल में तीन स्थानों पर पटरी टूट गई, जिससे पानी खेतों में फैलने लगा और फसलें जलभराव की चपेट में आ गईं। जलभराव की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में किसान मौके पर पहुंचे। फसलों को डूबने से बचाने के लिए किसानों ने बारिश की परवाह किए बिना मिट्टी डालकर और कटान रोकने का प्रयास करते हुए स्वयं ही टूटी पटरी की मरम्मत शुरू कर दी। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते पटरी नहीं रोकी जाती तो बड़ी मात्रा में फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो सकती थीं। ग्रामीणों ने नहर विभाग से मांग की है कि बारिश के मौसम में माइनरों की नियमित निगरानी कर कमजोर स्थानों को समय रहते मजबूत कराया जाए, ताकि किसानों की मेहनत और फसलें सुरक्षित रह सकें।