सामुदायिक मध्यस्थता से वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की दिशा में पहल, बागपत में पायलट परियोजना शुरू

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बागपत के सहयोग से “सामुदायिक मध्यस्थता : वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की ओर” शीर्षक पायलट परियोजना का शुभारंभ किया। यह पहल ग्रामीण स्तर पर विवादों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सामुदायिक मध्यस्थता से वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की दिशा में पहल, बागपत में पायलट परियोजना शुरू

सामुदायिक मध्यस्थता से वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की दिशा में पहल, बागपत में पायलट परियोजना शुरू
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बागपत के सहयोग से “सामुदायिक मध्यस्थता : वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की ओर” शीर्षक पायलट परियोजना का शुभारंभ किया। यह पहल ग्रामीण स्तर पर विवादों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कार्यक्रम का उद्घाटन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने किया। इस अवसर पर विधिक सेवा प्राधिकरणों के अधिकारी, जनपद के न्यायिक अधिकारी, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, अधिवक्ता, मध्यस्थ, पैरालीगल वॉलंटियर्स तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
परियोजना के अंतर्गत बागपत जनपद के छह गांवों को पायलट क्रियान्वयन के लिए चयनित किया गया है। उद्घाटन संबोधन में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि पारिवारिक विवाद, पड़ोसी झगड़े और भूमि संबंधी मामलों जैसे अनेक स्थानीय विवादों का समाधान लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बजाय सामुदायिक संवाद और मध्यस्थता के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता अधिनियम, 2023 ने इस व्यवस्था को वैधानिक आधार प्रदान किया है, जिससे पारंपरिक सामाजिक समाधान प्रणाली को आधुनिक कानूनी सुरक्षा, गोपनीयता और निष्पक्षता के साथ लागू किया जा सकता है। इस पहल के तहत स्थानीय समुदाय के सम्मानित व्यक्तियों—जैसे सेवानिवृत्त शिक्षक, वरिष्ठ नागरिक, समाजसेवी और अन्य जागरूक नागरिकों—की पहचान कर उन्हें वार्ता कौशल, सक्रिय श्रवण और निष्पक्ष मध्यस्थता का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये लोग औपचारिक न्याय व्यवस्था और समाज के बीच सेतु की भूमिका निभाएंगे। परियोजना का उद्देश्य ऐसे सशक्त ग्रामीण समुदाय तैयार करना है, जो प्रारंभिक स्तर पर ही विवादों का समाधान कर सकें। बागपत में शुरू की गई यह पहल भविष्य में पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किए जाने के मॉडल के रूप में विकसित होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में अनेक अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आमजन भी उपस्थित रहे।