गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त,दो टावर पूरी तरह ध्वस्त करने के आदेश

गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त,दो टावर पूरी तरह ध्वस्त करने के आदेश

तेजस न्यूज संवाददाता 

टावर 16, 17, 18 और 19 के नौवें व दसवें फ्लोर भी गिरेंगे, बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना

प्रयागराज/गाजियाबाद। गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी में अवैध निर्माण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए बिल्डर और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने सोसायटी के टावर नंबर 27 और 28 को पूरी तरह ध्वस्त करने का आदेश दिया है। वहीं टावर नंबर 16, 17, 18 और 19 के अवैध रूप से निर्मित नौवें और दसवें फ्लोर को दो महीने के भीतर गिराने के निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने मामले में बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना भी लगाया है। यह रकम एक महीने के भीतर गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (GGRWA) के खाते में जमा करानी होगी। अदालत ने जीडीए की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण सोसायटी के निवासियों को परेशानी उठानी पड़ी।

ध्वस्तीकरण का खर्च भी बिल्डर से ही  वसूला जाएगा

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि अवैध निर्माणों को गिराने में आने वाला पूरा खर्च संबंधित प्रमोटर से भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूल किया जाए। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान जीडीए को पुलिस और प्रशासन की ओर से आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। अदालत ने मामले में तीसरी बार दी गई शमन (कंपाउंडिंग) प्रक्रिया को पूरी तरह अवैध माना है।

जीडीए को प्रत्येक याचिकाकर्ता को देने होंगे 50 हजार रुपये

अदालत ने अवैध निर्माण के मामले में जीडीए अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए प्रत्येक याचिकाकर्ता को 50-50 हजार रुपये की कॉस्ट अदा करने का आदेश दिया है। अदालत ने फायर एनओसी और कंप्लीशन सर्टिफिकेट उपलब्ध न होने के मामले में भी गंभीर चिंता जताई। मामले में बिल्डर द्वारा कॉमन एरिया को कथित तौर पर अवैध रूप से बेचे जाने पर भी अदालत ने सख्त रुख अपनाया।

दो सप्ताह में एफआईआर, एडिशनल सीपी स्तर का अधिकारी करेगा जांच

हाईकोर्ट ने प्रमोटर के खिलाफ दो सप्ताह के भीतर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। मामला धोखाधड़ी और उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम के उल्लंघन से संबंधित है। अदालत ने पूरे प्रकरण की जांच एडिशनल पुलिस कमिश्नर स्तर के अधिकारी से कराने का आदेश भी दिया है।

                          (अजय प्रताप सेवानिवृत )

जानकारी के मुताबिक वर्ष 2018 में दर्ज एफआईआर की जांच में बिल्डर को बिना समुचित जांच के क्लीन चिट देने के मामले में विवेचक सुरेंद्र सिंह को तत्काल निलंबित करने और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

85 खरीदारों को ब्याज सहित रकम लौटानी होगी

अदालत ने बिल्डर को 85 खरीदारों की रकम 10 प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया है। फैसले में अवैध निर्माण, कॉमन एरिया की बिक्री और संबंधित नियमों के अनुपालन में हुई कथित अनियमितताओं को गंभीरता से लिया गया है।

 हालांकि जानकारी अभी यह भी मिल रही है कि अभी तक बिल्डर के द्वारा किसी को यह फ्लैट बेचे नहीं गए थे।

                           (प्रतीक तिवारी स्थानीय निवासी )

हाईकोर्ट के इस फैसले को गुलमोहर ग्रीन्स सोसायटी के निवासियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आदेश में जहां अवैध निर्माणों को हटाने की समयसीमा तय की गई है। वहीं जिम्मेदार बिल्डर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं।