पॉलीथिन अभियान से दुकानदारों में रोष, नगर निगम टीम पर उत्पीड़न का आरोप, जब्त सामान पर भी उठे सवाल

गाजियाबाद में लाइनपार क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान करीब 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूलने का दावा, थोक बाजारों और फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की मांग

पॉलीथिन अभियान से दुकानदारों में रोष, नगर निगम टीम पर उत्पीड़न का आरोप, जब्त सामान पर भी उठे सवाल

तेजस न्यूज संवाददाता 

गाजियाबाद में लाइनपार क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान करीब 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूलने का दावा, थोक बाजारों और फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की मांग

गाजियाबाद। प्रतिबंधित पॉलीथिन और प्लास्टिक बैग के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई को लेकर लाइनपार क्षेत्र के दुकानदारों में नाराजगी देखने को मिल रही है। दुकानदारों ने अभियान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नगर निगम की टीम पर छोटे व्यापारियों को बेवजह परेशान करने और चुनिंदा दुकानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। वहीं कार्रवाई का नेतृत्व कर रहीं फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर श्वेता सिंह ने अभियान को नियमित कार्रवाई का हिस्सा बताते हुए गुरुवार को करीब 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने और राजस्व वसूली की जानकारी दी।

छापेमारी की सूचना मिलते ही कई

दुकानदारों ने बंद की दुकानें

लाइनपार क्षेत्र में फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर श्वेता सिंह के नेतृत्व में नगर निगम की टीम ने प्रतिबंधित पॉलीथिन और प्लास्टिक बैग के खिलाफ अभियान चलाया। इस दौरान दुकानों की जांच कर पॉलीथिन जब्त की गई और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कुछ दुकानदारों से जुर्माना भी वसूला गया। कार्रवाई के बाद स्थानीय व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई। दुकानदारों का आरोप है कि अभियान के दौरान सभी दुकानों पर एक समान तरीके से जांच नहीं की जाती, बल्कि कुछ दुकानों को पहले से चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। उनका कहना है कि जैसे ही टीम के पहुंचने की सूचना क्षेत्र में फैली, कई दुकानदारों ने कार्रवाई से बचने के लिए अपनी दुकानें बंद कर दीं।व्यापारियों ने मांग की है कि प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलाते समय पारदर्शिता बरती जाए और किसी भी दुकानदार के साथ भेदभाव न किया जाए।

छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई, थोक बाजारों

और फैक्ट्रियों पर कब होगी जांच ?

दुकानदारों का कहना है कि यदि प्रतिबंधित पॉलीथिन के इस्तेमाल और बिक्री पर प्रभावी रोक लगानी है तो कार्रवाई केवल खुदरा दुकानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए पॉलीथिन के थोक बाजारों और प्रतिबंधित प्लास्टिक बनाने वाली फैक्ट्रियों की भी जांच की जानी चाहिए। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि जब प्रतिबंधित पॉलीथिन बाजार में उपलब्ध है, तो इसकी आपूर्ति करने वाले स्रोतों के खिलाफ भी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? उनका कहना है कि छोटे दुकानदारों से जुर्माना वसूलने और उनका सामान जब्त करने भर से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए उत्पादन, थोक बिक्री और वितरण की पूरी शृंखला पर प्रभावी निगरानी जरूरी है। कुछ दुकानदारों ने नगर निगम के अधिकारियों से अभियान की प्रक्रिया स्पष्ट करने, जांच में समानता रखने और छोटे व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान न करने की मांग की है।

श्वेता सिंह बोलीं—लगातार चलाया जा रहा

है अभियान

फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर श्वेता सिंह के अनुसार, प्रतिबंधित पॉलीथिन के खिलाफ समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्रों में अभियान चलाया जाता है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को मिर्जापुर वाली रोड और डीएवी चौक से विश्वकर्मा चौक तक दुकानों पर छापेमारी की गई। उनके मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान दुकानदारों पर करीब 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया और राजस्व की वसूली की गई। विभाग की ओर से अभियान को प्रतिबंधित पॉलीथिन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की कार्रवाई बताया गया है। हालांकि दुकानदारों की ओर से उठाए गए सवालों के बीच यह भी जरूरी है कि कार्रवाई के मानकों जब्ती की प्रक्रिया और जुर्माने से संबंधित जानकारी को स्पष्ट किया जाए ताकि अभियान की पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार के पक्षपात की आशंका न रहे।

जब्त पॉलीथिन का आखिर होता क्या है?

इस पूरे मामले में एक अहम सवाल जब्त किए गए पॉलीथिन और प्लास्टिक के सामान के निस्तारण को लेकर भी उठा है। फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर श्वेता सिंह से जब पूछा गया कि अभियान के दौरान जब्त किए गए सामान का आगे क्या किया जाता है ? तो उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी उनके पास नहीं रहती। उनके अनुसार जब्त सामान के संबंध में जानकारी प्रवर्तन विभाग ही दे सकता है।यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी प्रवर्तन अभियान में जब्त किए गए सामान का रिकॉर्ड उसके भंडारण और नियमानुसार निस्तारण की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए। इससे कार्रवाई की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।

जब्त सामान को दोबारा बाजार में बेचने का आरोप, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

स्थानीय स्तर पर कुछ सूत्रों के हवाले से यह दावा भी किया जा रहा है कि जब्त किया गया सामान कथित तौर पर प्रवर्तन विभाग के कुछ कर्मचारियों के माध्यम से कम कीमत पर दोबारा बाजार में बेचा दिया  जाता है। हालांकि इस दावे की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। न ही इस संबंध में कोई दस्तावेजी प्रमाण या आधिकारिक बयान सामने आया है।

पारदर्शिता की मांग

पॉलीथिन के खिलाफ कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण और प्रतिबंधित प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाने के उद्देश्य से की जाती है। लेकिन अभियान की प्रभावशीलता के साथ उसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण है। अब सवाल यह है कि नगर निगम जब्त किए गए सामान के रिकॉर्ड और निस्तारण की प्रक्रिया को सार्वजनिक करेगा या नहीं। साथ ही क्या प्रतिबंधित पॉलीथिन की आपूर्ति करने वाले थोक कारोबारियों और निर्माताओं के खिलाफ भी इसी तरह कार्रवाई की जाएगी ? फिलहाल लाइनपार क्षेत्र में अभियान को लेकर दुकानदारों की नाराजगी और जब्त सामान के निस्तारण पर उठे सवालों के बीच नगर निगम की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण का इंतजार है।