हिंदी के काव्य रस में डूबा खेकड़ा, कवियों ने रचनाओं से जगाया मातृभाषा का गौरव
हिंदी दिवस पर सोमवार को खेकड़ा कस्बे के मोहल्ला रामपुर में आयोजित काव्य गोष्ठी में हिंदी की महत्ता और गौरव का गुणगान हुआ। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी को देश की पहचान, संस्कृति की संवाहक और जन-जन की भावनाओं से जुड़ी भाषा बताया। कविताओं की भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा और तालियों की गड़गड़ाहट से कवियों का उत्साहवर्धन किया गया।
हिंदी के काव्य रस में डूबा खेकड़ा, कवियों ने रचनाओं से जगाया मातृभाषा का गौरव
- काव्य गोष्ठी में हिंदी को बताया देश की पहचान और संस्कृति की संवाहक
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
हिंदी दिवस पर सोमवार को कस्बे के मोहल्ला रामपुर में आयोजित काव्य गोष्ठी में हिंदी की महत्ता और गौरव का गुणगान हुआ। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी को देश की पहचान, संस्कृति की संवाहक और जन-जन की भावनाओं से जुड़ी भाषा बताया। कविताओं की भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा और तालियों की गड़गड़ाहट से कवियों का उत्साहवर्धन किया गया।
शिक्षक मनोज धामा के आवास पर आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। मनोज धामा ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति में उसकी अपनी भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा, "निज भाषा उन्नति है, सब उन्नति का मूल, निज भाषा के ज्ञान बिन मिटत न हिय को सूल।" उन्होंने लोगों से हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के साथ ही इसके प्रचार-प्रसार का आह्वान किया। कवयित्री पारुल चौधरी मन ने अपनी रचना के माध्यम से हिंदी की गरिमा, सरलता, भावना, गहनता और विविधता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कवि गजेंद्र कौशिक गजानन ने लोकभाषा की मिठास और हिंदी के प्रति सम्मान को अपनी पंक्तियों में पिरोते हुए भारतीय संस्कृति और प्रकृति के प्रचार का संदेश दिया। कवि बसंत कुमार ने हिंदी को हिंदुस्तान के माथे की बिंदी बताते हुए इसकी मिठास और महत्व को रेखांकित किया। कवयित्री पूनम मलिक ने हिंदी को वीरों की शान, जन-गण-मन का गान और हिंदुस्तान की पहचान बताते हुए कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि देश की आत्मा से जुड़ी भावना है। कवि डॉ. प्रीतम सिंह ने अपनी रचना के माध्यम से हिंदी को भारत की पहचान से जोड़ते हुए इसके सम्मान की बात कही। वहीं कवि कश्यप राजेश राज ने हिंदी को जीवन की परिभाषा, हिंदुस्तान की शान और काव्य जगत की जान बताते हुए लोगों से अपनी भाषा पर गर्व करने का आह्वान किया। इस मौके पर लखन कुमार, सोमनाथ धामा, बबीता, गर्वित धामा और मयंक कौशिक मौजूद रहे।