जर्जर हवेली बनी खतरा, दहशत में जी रहे मोहल्लेवासी
खेकड़ा कस्बे के छोटा बाजार से सटे आर्यसमाज मोहल्ले में स्थित लाला ढक्कन मल की जर्जर हवेली आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बनी हुई है। खंडहर में तब्दील हो चुकी हवेली की दीवारों में गहरी दरारें आ चुकी हैं। ऐसे में तेज बारिश, आंधी या भूकंप के दौरान हवेली के भरभराकर गिरने की आशंका से मोहल्लेवासी भयभीत हैं। लोगों ने प्रशासन से हवेली को गिरवाकर संभावित हादसे को रोकने की मांग की है। उधर, हवेली के वास्तविक वारिस वर्षों पहले कस्बा छोड़कर गाजियाबाद में बस चुके हैं। प्रशासन उनसे संपर्क साधने में जुटा है।
जर्जर हवेली बनी खतरा, दहशत में जी रहे मोहल्लेवासी
- हवेली के चारों वारिस वर्षो से रहते है गाजियाबाद
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
कस्बे के छोटा बाजार से सटे आर्यसमाज मोहल्ले में स्थित लाला ढक्कन मल की जर्जर हवेली आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बनी हुई है। खंडहर में तब्दील हो चुकी हवेली की दीवारों में गहरी दरारें आ चुकी हैं। ऐसे में तेज बारिश, आंधी या भूकंप के दौरान हवेली के भरभराकर गिरने की आशंका से मोहल्लेवासी भयभीत हैं। लोगों ने प्रशासन से हवेली को गिरवाकर संभावित हादसे को रोकने की मांग की है। उधर, हवेली के वास्तविक वारिस वर्षों पहले कस्बा छोड़कर गाजियाबाद में बस चुके हैं। प्रशासन उनसे संपर्क साधने में जुटा है।
आर्यसमाज मोहल्ले में स्थित इस पुरानी हवेली में कभी रौनक रहती थी। खूबसूरत नक्काशी वाली यह इमारत अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। इसकी दीवारों में जगह-जगह गहरी दरारें पड़ गई हैं और हवेली लंबे समय से खाली पड़ी है। आसपास आबादी होने के कारण इसके गिरने से जान-माल के नुकसान का खतरा बना हुआ है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि किसी बड़े हादसे से पहले ही प्रशासन को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। नगरपालिका के अभिलेखों में हवेली श्रीनिवास, प्रकाश चंद, विष्णु और कालूराम के नाम दर्ज है। बताया गया है कि चारों वारिस वर्षों पहले कस्बा छोड़कर गाजियाबाद में बस गए थे। ऐसे में हवेली के स्वामित्व और उसे गिराने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन के सामने समस्या बनी हुई है। अधिकारियों की ओर से वारिसों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
वारिस नहीं, फिर भी आकाश से किया जा रहा संपर्क
प्रकाश चंद के भतीजे आकाश गुप्ता कुछ वर्ष पहले तक इसी हवेली में रहते थे। अब वह कस्बे की निर्भय कॉलोनी में रहते हैं। आकाश का कहना है कि वह हवेली के वारिस नहीं हैं, इसके बावजूद पुलिस-प्रशासन बार-बार उनसे संपर्क करता है। वह कई बार वास्तविक वारिसों के नाम अधिकारियों को बता चुके हैं। उन्होंने आग्रह किया कि प्रशासन गाजियाबाद में रह रहे वास्तविक वारिसों से संपर्क कर हवेली को गिराने सहित आवश्यक कार्रवाई करे, ताकि मोहल्ले के लोगों को संभावित खतरे से राहत मिल सके।


