बडा मंदिर बडागांव में हुआ सिद्धचक्र विधान

दशलक्षण पर्व के चौथे दिन बडागांव के बडा जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान हुआ। क्षेत्र भर के मंदिरों में उत्तम शौच धर्म की पूजा हुई।

बडा मंदिर बडागांव में हुआ सिद्धचक्र विधान

दशलक्षण पर्व-

बडा मंदिर बडागांव में हुआ सिद्धचक्र विधान
- खेकड़ा के मंदिरों में उत्तम शौच धर्म की हुई पूजा
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
दशलक्षण पर्व के चौथे दिन बडागांव के बडा जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान हुआ। क्षेत्र भर के मंदिरों में उत्तम शौच धर्म की पूजा हुई।
बडागांव के बडा जैन मंदिर में चन्द्रमति माता ने प्रवचन करते हुए कहा कि मन अपवित्र रहेगा तो आत्मा कभी भी पवित्र नहीं हो सकेगी। मन में अपवित्रता, क्रोध,अहंकार, असत्य, लोभ से पैदा होती है। लोभ समस्त पापों का बाप होता है। कहा कि जो प्राणी संतोषी है वही सुखी रह सकता है। अत्यधिक धन का आना भी असंतोष का मुख्य कारण है, इसलिए जो है, जितना है, उतने में ही संतुष्ट होना चाहिए। लोभ तन, धन, यश, वैभव, ज्ञान आदि किसी भी प्रकार का हो सकता है। जो तुम्हें संसार में भटकाए वह लोभ है। जीवन में लाभ बढ़ने के साथ लोभ की वृद्धि होती जाती है। पवित्र मन में ही सत्य, संयम, पूजन, भक्ति, श्रद्धा आदि गुण ठहरते हैं, यदि शुद्ध होना है तो लोभ रूपी गंदगी का त्याग करो। माता चन्द्रमति के सानिध्य में सिद्धचक्र विधान हुआ। कस्बे के भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में उत्तम शौच धर्म की पूजा हुई। दिन भर मंदिर में धर्मावलम्बियों का तांता लगा रहा।