गन्ने से बनाया ‘ब्रांड’, बागपत के युवा किसान ने रची सफलता की नई कहानी

बागपत जनपद के ग्राम फैजपुर निनाना निवासी युवा किसान रूपेंद्र धनकड़ ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए गन्ने को नया आयाम दिया है। उन्होंने खेती को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे एक सफल व्यवसाय में बदल दिया है। आज उनके द्वारा तैयार किए गए प्राकृतिक उत्पाद न सिर्फ बाजार में लोकप्रिय हो रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं।

गन्ने से बनाया ‘ब्रांड’, बागपत के युवा किसान ने रची सफलता की नई कहानी

गन्ने से बनाया ‘ब्रांड’, बागपत के युवा किसान ने रची सफलता की नई कहानी
— फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से बढ़ी आय, अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
बागपत, तेजस न्यूज रिपोर्टर
जनपद के ग्राम फैजपुर निनाना निवासी युवा किसान रूपेंद्र धनकड़ ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए गन्ने को नया आयाम दिया है। उन्होंने खेती को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे एक सफल व्यवसाय में बदल दिया है। आज उनके द्वारा तैयार किए गए प्राकृतिक उत्पाद न सिर्फ बाजार में लोकप्रिय हो रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं।
रूपेंद्र पहले सामान्य किसानों की तरह गन्ने की खेती कर उसे मंडी में बेचते थे, जिससे सीमित आय ही हो पाती थी। लेकिन कुछ अलग करने की सोच ने उन्हें नई राह दिखाई। कृषि विभाग की संगोष्ठियों, मेलों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़कर उन्होंने फूड प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जानकारी हासिल की, जिसने उनके काम को नई दिशा दी। इसके बाद उन्होंने ‘वेदांशी प्राकृतिक उत्पाद’ नाम से अपना ब्रांड शुरू किया। इस ब्रांड के तहत उन्होंने गन्ने के रस से केमिकल-फ्री आइसक्रीम, कुल्फी, गन्ना-इमली की चटनी, पेड़े, हर्बल चाय, कोल्ड कॉफी और पारंपरिक विधि से बना सिरका जैसे कई उत्पाद तैयार किए। इन उत्पादों की खासियत यह है कि ये पूरी तरह प्राकृतिक हैं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों को खासे पसंद आ रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से मिले प्रशिक्षण और जिला प्रशासन द्वारा मेलों-प्रदर्शनों में स्टॉल उपलब्ध कराने से उन्हें अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का बेहतर अवसर मिला। धीरे-धीरे उनके उत्पाद मेरठ मंडल के कई जिलों में पहचान बनाने लगे। रूपेंद्र धनकड़ की सफलता का असर उनकी आय पर भी साफ दिख रहा है। जहां पहले सीमित कमाई होती थी, वहीं अब फूड प्रोसेसिंग के जरिए उनकी मासिक आय 60 से 70 हजार रुपये तक पहुंच गई है। खास बात यह है कि अब उनकी आय सालभर बनी रहती है, जिससे आर्थिक स्थिरता आई है। वह केवल खुद तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी यह पहल अब सामूहिक बदलाव का रूप ले रही है, जहां किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उद्यमिता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन, नई सोच और सरकारी योजनाओं के सहयोग से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।