अक्षत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई प्रशासन को फटकार
ग्रेटर नोएडा पुलिस ने दी सफाई, डीएम का नहीं कोई वास्ता
तेजस न्यूज संवाददाता
ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध नगर यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को सीजेपी प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस को लेकर सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की तरफ से प्रशासन को फटकार लगाई गई है। इस फटकार के बाद ग्रेटर नोएडा पुलिस के डीसीपी की तरफ से एक बयान भी जारी किया गया है। इस बयान के माध्यम से ग्रेटर नोएडा पुलिस ने स्थिति को साफ करने की कोशिश की हैं।

डीसीपी ग्रेटर नोएडा की तरफ से बयान जारी करते हुए कहा गया है कि इस पूरे घटनाक्रम में न सिर्फ जिलाधिकारी का कोई वास्ता है। बल्कि उपरोक्त नोटिस को वापस भी ले लिया गया था। गौरतलब है की सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान छात्र अक्षत त्रिपाठी पर कॉलेज का माहौल खराब करने का आरोप लगाया गया था। नोटिस जारी करते हुए छात्र अक्षत त्रिपाठी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। यह नोटिस इकोटेक-1 थाना पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर लगाया गया था। हालांकि, ग्रेटर नोएडा डीसीपी के आदेश पर नोटिस को निरस्त भी कर दिया गया है।
सीजेपी नेता ने लगाया था जिलाधिकारी पर आरोप
कॉकरोज जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने 8 सितंबर को सोशल मीडिया एक्स पर एक ट्वीट करते हुए जिलाधिकारी मेधा रूपम का जिक्र किया था। उन्होंने एक्स पर लिखा था कि क्या गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट का एक सितंबर का ऐतिहासिक आदेश नहीं पढ़ा था। सीजेपी विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने वाले प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से छूट दी हुई है।
5 लाख रुपये का जुर्माना नहीं भरने की सीजेपी ने दी थी सलाह
छात्र अक्षत त्रिपाठी को कॉकरोज जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने 5 लाख रुपये की जमानत राशि जमा नहीं करने को कहा गया था। छात्र अक्षत त्रिपाठी से कॉकरोज जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने कहा था कि वह जल्द से जल्द इसके लिए कार्रवाई करें और जिलाधिकारी मेधा रूपम के फैसले की एक कॉपी उन्हें भेंजे। हम किसी भी छात्र को निशाना नहीं बनने देंगे।
पुलिस ने त्रुटिपूर्ण नोटिस को ले लिया है वापस
ग्रेटर नोएडा के डीसीपी की तरफ से कहा गया है कि संबंधित मामले को संज्ञान में लेते हुए अक्षत त्रिपाठी को कार्यालय मजिस्ट्रेट तृतीय द्वारा धरना प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए धारा 126/135 बीएनएसएस के क्रम में धारा 130 का नोटिस शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बॉन्ड पेपर 4 सितंबर को जारी किया गया था। इस मामले में उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद 5 सितंबर को त्रुटिपूर्ण नोटिस को निरस्त कर दिया गया था। त्रुटिपूर्ण नोटिस जारी किए जाने और बरती गई लापरवाही के संबंध में संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पहले ही की जा चुकी हैं।
जिलाधिकारी का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है
ग्रेटर नोएडा के डीसीपी की तरफ से बयान जारी किया गया है कि गौतमबुद्ध नगर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू है। ऐसे में यह नोटिस कार्यालय मजिस्ट्रेट तृतीय गौतमबुद्ध नगर से जारी किया गया है। इस मामले में जिलाधिकारी मेधा रूपम का कोई संबंध नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट की संज्ञान में यह मामला आने के बाद प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा नोटिस जारी करने के मामले में नाराजगी जताई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने की कैसे हुई हिम्मत
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। मजिस्ट्रेट की हिम्मत नोटिस जारी करने की कैसे हो गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन मजिस्ट्रेट कैसे कर सकता है।