शिक्षक दिवस पर काव्य गोष्ठी में कवियों ने शिक्षकों की महिमा का किया बखान

खेकड़ा कस्बे में लोक कला साहित्य संस्कृति समिति के तत्वावधान में शिक्षक दिवस के अवसर पर भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर कवियों ने शिक्षकों की महिमा और उनके महत्व पर सुंदर काव्य पाठ प्रस्तुत किए।

शिक्षक दिवस पर काव्य गोष्ठी में कवियों ने शिक्षकों की महिमा का किया बखान

शिक्षक दिवस पर काव्य गोष्ठी में कवियों ने शिक्षकों की महिमा का किया बखान
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
कस्बे में लोक कला साहित्य संस्कृति समिति के तत्वावधान में शिक्षक दिवस के अवसर पर भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर कवियों ने शिक्षकों की महिमा और उनके महत्व पर सुंदर काव्य पाठ प्रस्तुत किए।
कवियों ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को स्मरण करते हुए गुरुजनों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। कवि राजेश कश्यप ने सुनाया, “शीश नवाकर निज गुरु को सादर प्रणाम, जिनकी कृपा से मिला, ज्ञान और सम्मान।” कवि सुमित शर्मा ‘सूर्य’ ने कहा, “शिक्षक सिर्फ़ एक नाम नहीं, पहचान हो, जीवन का सबसे पवित्र महादान हो, आपके बिना ये रास्ते अधूरे से लगते हैं, आपके चरणों में भी तो भगवान बसते हैं।” कवियत्री पारूल चौधरी ‘मन’ ने सुनाया, “कुम्भकार की भांति जो मिट्टी से घड़े बनाए, गुरु वही जो चंहुओर शिक्षा के दीप जलाए।” कवियत्री भावना तोमर ने कहा, “अज्ञान के कांटे मैं तुम्हारे पथ से चुनती रहूंगी, शिक्षिका हूं तुम्हारी, तुम्हारे लिये सुंदर भविष्य बुनती रहूंगी।” कवि गजेन्द्र गजानन ने सुनाया, “धन्य मात-पिता गुरु की शिक्षा, जिसने हमारे सपने बुने, गुरुजन की कृपा से पत्थर भी भगवान बने।” कवियत्री पूनम नैन मलिक ने कहा, “हर बच्चे को चाहिए, मिलना समुचित ज्ञान, पंख और परवाज़ से, ऊंची भरें उड़ान।” कवि मनोज कुमार ने सुनाया, “अनगिनत है रूप गुरु के कण-कण में विद्यमान, शब्दों में नहीं हो सकता गुरु महिमा का बखान।” कार्यक्रम का संचालन कवि राजेश कश्यप ने किया। श्रोताओं में मयंक, आरना, आकृति सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।