एफआईआर के लिए ‘खर्चा’ मांगने वाले एसएचओ पर उठे सवाल — विजयनगर थाने में बकरा चोरी की रिपोर्ट दर्ज न होने से अधिवक्ता नाराज

विजयनगर थाना क्षेत्र में बकरा चोरी की घटना के बाद रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे अधिवक्ता से थानेदार द्वारा कथित रूप से “खर्चा” मांगने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी ने एफआईआर दर्ज करने के बदले बकरे की कीमत पूछी और उसी के अनुरूप ‘खर्चे’ की बात कही।

एफआईआर के लिए ‘खर्चा’ मांगने वाले एसएचओ पर उठे सवाल — विजयनगर थाने में बकरा चोरी की रिपोर्ट दर्ज न होने से अधिवक्ता नाराज

तेजस न्यूज संवाददाता

एफआईआर के लिए ‘खर्चा’ मांगने वाले एसएचओ पर उठे सवाल — विजयनगर थाने में बकरा चोरी की रिपोर्ट दर्ज न होने से अधिवक्ता नाराज

गाजियाबाद,


विजयनगर थाना क्षेत्र में बकरा चोरी की घटना के बाद रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे अधिवक्ता से थानेदार द्वारा कथित रूप से “खर्चा” मांगने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी ने एफआईआर दर्ज करने के बदले बकरे की कीमत पूछी और उसी के अनुरूप ‘खर्चे’ की बात कही।

पीड़ित अधिवक्ता सलमान चौधरी, निवासी मिर्जापुर गांव, का कहना है कि 14 अक्टूबर की रात को उनके पिता इरफान चौधरी घेर में सो रहे थे, तभी करीब दो बजे एक ईको गाड़ी में सवार तीन बदमाशों ने दीवार फांदकर उनका काला बकरा चोरी कर लिया। शोर मचाने पर बदमाश मौके से फरार हो गए।

घटना सीसीटीवी में कैद


पूरी वारदात पास के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। फुटेज में एक बदमाश को भागते समय सड़क पर गिरते और दूसरे बदमाश को बकरा गोद में उठाकर गाड़ी में डालते हुए साफ देखा जा सकता है। फुटेज में ईको गाड़ी का नंबर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

थाने में ‘खर्चे’ की मांग!


अधिवक्ता का आरोप है कि फुटेज और तहरीर देने के बावजूद विजयनगर थाना प्रभारी शशि चौधरी ने रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय कहा कि “अपने माल की सुरक्षा खुद करो, पुलिस हर घर की रखवाली नहीं कर सकती।” इतना ही नहीं, उन्होंने कथित तौर पर बकरे की कीमत पूछी और उसी के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का खर्चा मांगा।

हालांकि पुलिस का कहना है कि पीड़ित की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। लेकिन पीड़ित का कहना है कि उन्होंने तहरीर 14 अक्टूबर को दी थी लेकिन 18 अक्टूबर को फिर दर्ज की गई वह भी कुछ अधिकारियों के आदेश के बाद।

यह मामला सवाल खड़ा करता है कि जब पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ लगातार जनता-केंद्रित पुलिसिंग पर जोर दे रहे हैं, तो थानेदार स्तर पर इस तरह की मनमानी और कथित वसूली क्यों जारी है? क्या जनता की एफआईआर दर्ज कराने के लिए भी अब कीमत तय की जाएगी?