गौरीपुर जवाहरनगर में पशु बांझपन निवारण व सहफसली खेती पर जागरूकता कार्यक्रम
कृषि विज्ञान केंद्र, बागपत के तत्वावधान में ग्राम गौरीपुर जवाहरनगर में पशुओं में बांझपन की समस्या के समाधान और गन्ने की सहफसली खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों और पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीकों से खेती और पशुपालन की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
गौरीपुर जवाहरनगर में पशु बांझपन निवारण व सहफसली खेती पर जागरूकता कार्यक्रम
- पशुपालकों को संतुलित आहार और खनिज लवण के महत्व की दी जानकारी
- गन्ने के साथ दलहनी फसलों की खेती से अतिरिक्त आय का सुझाव
बागपत, तेजस न्यूज रिपोर्टर
कृषि विज्ञान केंद्र, बागपत के तत्वावधान में ग्राम गौरीपुर जवाहरनगर में पशुओं में बांझपन की समस्या के समाधान और गन्ने की सहफसली खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों और पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीकों से खेती और पशुपालन की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान पशुधन विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार ने पशुओं में संतुलित आहार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आजकल पशुओं को संतुलित आहार न मिलने के कारण उनमें बांझपन और रिपीट ब्रीडिंग की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस समस्या से बचाव के लिए पशुओं को हरे चारे के साथ-साथ रातिब मिश्रण और खनिज लवण देना आवश्यक है, जिससे उनकी प्रजनन क्षमता बेहतर बनी रहती है। उन्होंने कहा कि पशुपालक यदि नियमित रूप से पशुओं के आहार में खनिज लवण शामिल करें, तो बांझपन और रिपीट ब्रीडिंग जैसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कार्यक्रम में शामिल पशुपालकों को जरूरत के अनुसार खनिज लवण और पेट के कीड़ों की दवा का निःशुल्क वितरण भी किया गया। इस अवसर पर केंद्र के पादप सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. शिवम सिंह ने किसानों को गन्ने के साथ दलहनी फसलों की सहफसली खेती के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बसंतकालीन गन्ने के साथ उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों की खेती करने से खेत की उर्वरता बनी रहती है और किसानों को अतिरिक्त आय भी प्राप्त होती है। साथ ही उन्होंने किसानों को सरसों की फसल में लगने वाले सफेद रतुआ रोग और गेहूं में होने वाली ब्लॉच बीमारी के बारे में भी जागरूक किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में इन बीमारियों के लिए किसी प्रकार के रासायनिक कवकनाशक के छिड़काव की आवश्यकता नहीं है। यदि खेत में संक्रमित पौधे दिखाई दें, तो उन्हें तोड़कर खेत से बाहर कर देना ही सबसे प्रभावी उपाय है। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के स्टाफ आकाश तोमर सहित कृषक पाल सिंह, रण सिंह, सुरेंद्र, उदय समेत करीब 50 किसान उपस्थित रहे।