गुदा रोगों का उपचार क्षार सूत्र से गाजियाबाद में भी हुआ सम्भव
सेक्टर-23 स्थित आयुर्वेद चिकित्सा केंद्र में क्षार सूत्र चिकित्सा से गुदा रोगों के सफल उपचार की जानकारी देते हुए गुदा रोग विशेषज्ञ डॉ.अनुज त्यागी ने बताया कि यह पद्धति आयुर्वेद की प्राचीन और प्रमाणित शल्य चिकित्सा शाखा है, जिसमें बिना ब्लेड या कैंची के प्रयोग के, विशेष प्रकार के क्षार सूत्र (Alkaline seton) द्वारा रोगग्रस्त ऊतकों को नष्ट कर शरीर में नई स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण कराया जाता है
तेजस न्यूज संवाददाता
गाजियाबाद।
भगन्दर (Fistula)
बवासीर (Piles/Haemorrhoids)
फिशर (Fissure)
नाड़ी व्रण (Sinus)

बार-बार ऑपरेशन के बाद भी ठीक न होने वाले पुराने घाव का इलाज अब पूरी तरह संभव है इस बारे में तेजस न्यूज़ के संपादक तेजेश चौहान तेजस से विस्तार से चर्चा करते हुए सेक्टर-23 स्थित आयुर्वेद चिकित्सा केंद्र में क्षार सूत्र चिकित्सा से गुदा रोगों के सफल उपचार की जानकारी देते हुए गुदा रोग विशेषज्ञ डॉ.अनुज त्यागी ने बताया कि यह पद्धति आयुर्वेद की प्राचीन और प्रमाणित शल्य चिकित्सा शाखा है, जिसमें बिना ब्लेड या कैंची के प्रयोग के, विशेष प्रकार के क्षार सूत्र (Alkaline seton) द्वारा रोगग्रस्त ऊतकों को नष्ट कर शरीर में नई स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण कराया जाता है। उन्होंने बता कि लोग अक्सर यह मानते हैँ कि इसके उपचार में मरीज को गुदा मार्ग की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है लेकिन क्षार सूत्र के उपचार के किसी तरह की कोई कमजोरी नहीं आती है.

डॉ. त्यागी ने बताया कि क्षार सूत्र एवं क्षार कर्म में उपयोग होने वाला क्षार विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों से विशेष विधि द्वारा तैयार किया जाता है। जिसमें स्वाभाविक रूप से जीवाणुनाशक तथा सड़न रोकने वाले गुण पाए जाते हैं। रोग की प्रकृति के अनुसार क्षार सूत्र लेप, एवं क्षार कर्म चिकित्सा आदि को अलग-अलग तरीके से तैयार किया जाता है, ताकि प्रत्येक मरीज को उसके रोगानुसार सटीक उपचार दिया जा सके।

उन्होंने बताया कि आईएमएस, बीएचयू वाराणसी में शोध तथा डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रमाणित इस तकनीक के माध्यम से जटिल व पुराने गुदा रोग, जैसे –
भगन्दर (Fistula)
बवासीर (Piles/Haemorrhoids)
फिशर (Fissure)
नाड़ी व्रण (Sinus)
बार-बार ऑपरेशन के बाद भी ठीक न होने वाले पुराने घाव
का सफल और दीर्घकालिक इलाज संभव है, वह भी बिना बड़े ऑपरेशन के।

इसके साथ ही यह पद्धति त्वचा पर होने वाले मस्से, तिल, तथा फुंसी जैसे उभारों को भी सुरक्षित और प्रभावी ढंग से हटाने में कारगर है। उपचार के दौरान गुदा मार्ग की सामान्य कार्य क्षमता पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता, जिससे मरीज जल्दी स्वस्थ होकर अपनी दिनचर्या में लौट सकता है।

डॉ. अनुज त्यागी ने कहा कि उनकी पूरी टीम का आयुर्वेदिक क्षार सूत्र चिकित्सा का उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना ही नहीं, बल्कि शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रणाली को सक्रिय कर रोग की पुनरावृत्ति रोकना भी है। उन्होंने बताया कि नियमित परामर्श, संतुलित आहार, एवं जीवनशैली में सुधार से इन रोगों से पूर्ण रूप से राहत संभव है।