बागपत की 70 महिला बुनकरों को मिली नई पहचान
बागपत की पारंपरिक हैंडलूम कला और बुनकर संस्कृति को नई पहचान दिलाने के लिए जिलाधिकारी की अनोखी पहल रंग लाई है। वर्षों से बिना नाम के काम कर रहीं 70 महिला बुनकरों को पहली बार जीआई अधिकृत बुनकर का दर्जा मिला है। अब ये महिलाएँ न केवल योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ ले सकेंगी, बल्कि अपने हस्तशिल्प को राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में सक्षम होंगी।
बागपत की 70 महिला बुनकरों को मिली नई पहचान
- अस्मिता लाल की पहल से कारीगरों को मिला जीआई अधिकृत दर्जा
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
बागपत की पारंपरिक हैंडलूम कला और बुनकर संस्कृति को नई पहचान दिलाने के लिए जिलाधिकारी की अनोखी पहल रंग लाई है। वर्षों से बिना नाम के काम कर रहीं 70 महिला बुनकरों को पहली बार जीआई अधिकृत बुनकर का दर्जा मिला है। अब ये महिलाएँ न केवल योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ ले सकेंगी, बल्कि अपने हस्तशिल्प को राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में सक्षम होंगी।
बागपत की हेंडलूम नगरी खेकड़ा में अनेक महिलाएँ घरों में चारपाई, दरी और पारंपरिक कपड़े बनाती रही हैं, लेकिन उनके हुनर का श्रेय अक्सर बिचौलियों को चला जाता था। महिलाओं का कहना था कि हम बनाते हैं, पर पहचान कोई और ले जाता है। इसी पीड़ा को सुनकर जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने इस अनदेखे हुनर को आधिकारिक पहचान दिलाने का निर्णय लिया। फील्ड सर्वे और दस्तावेज़ प्रक्रिया पूरी होने के बाद 70 महिला बुनकरों का पंजीकरण जीआई अधिकृत सूची में किया गया। इससे बागपत की लोककला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में नया अवसर प्राप्त होगा। शनिवार को तहसील दिवस में महिलाओं का पंजीकृत कर उनको पहचान दी गई। महिलाओं ने इस पहल के लिए जिलाधिकारी अस्मिता लाल का आभार जताते हुए कहा कि अब उनकी मेहनत और कौशल की पहचान कागज़ पर दर्ज हो चुकी है। बुनकर महिलाओं में सावित्री, रेखा, अफसाना, राजकुमारी, नर्गिस, शोभा, अख्तरी, रेशमा, रिजवाना आदि शामिल रही।