जिला कारागार में जैन संत सौम्य सागर महाराज के प्रवचन
जिला कारागार बागपत में मंगलवार को जैन संत सौम्य सागर महाराज ने बंदियों को आध्यात्मिक प्रवचन देकर जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “सुबह का भूला यदि शाम को घर वापस आ जाए तो वह भूला नहीं कहलाता।” यह संदेश देते हुए उन्होंने बंदियों को प्रेरित किया कि जीवन में की गई गलतियों को सुधारते हुए भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
जिला कारागार में जैन संत सौम्य सागर महाराज के प्रवचन
- बंदियों को दिया जीवन सुधार का संदेश
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
जिला कारागार में मंगलवार को जैन संत सौम्य सागर महाराज ने बंदियों को आध्यात्मिक प्रवचन देकर जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “सुबह का भूला यदि शाम को घर वापस आ जाए तो वह भूला नहीं कहलाता।” यह संदेश देते हुए उन्होंने बंदियों को प्रेरित किया कि जीवन में की गई गलतियों को सुधारते हुए भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
जिला कारागार पहुंचे संत सौम्य सागर महाराज का जेल अधीक्षक प्रशांत मौर्य ने स्वागत किया। बंदियों को अपने प्रवचन में महाराजश्री ने कहा कि मनुष्य से भूल होना स्वाभाविक है, लेकिन गलती पर अड़े रहना सबसे बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि बंदी यदि जेल में रहते हुए आत्मचिंतन करें और आगामी जीवन को अपने परिवार की सेवा तथा ईश्वर की भक्ति में लगाएं, तो समाज में सम्मानपूर्वक नया अध्याय शुरू कर सकते हैं। उन्होंने बंदियों को संयम, सत्य, अहिंसा और सच्चे आचरण का पालन करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जेल केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और आत्मजागृति का अवसर प्रदान करने वाला स्थान भी है। प्रवचन कार्यक्रम के दौरान कई बंदियों ने आध्यात्मिक संदेशों को ध्यानपूर्वक सुना और अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। संत ने उन्हें जीवन की कठिन परिस्थितियों से निराश न होने, बल्कि धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर जेलर कस्तूरी लाल, प्रशांत कुमार सहित बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी और जेल प्रशासन के कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में संत महाराज को जेल प्रशासन की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया गया।