हेड कांस्टेबल अजय पंवार हत्याकांड में आरोपी शिक्षक को झटका, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज

सुन्हेड़ा गांव निवासी हेड कांस्टेबल अजय पंवार की हत्या के मामले में आरोपी शिक्षक मोहित को बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) को तत्परता से दर्ज होना तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का एफआईआर से मेल खाना मानते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया।

हेड कांस्टेबल अजय पंवार हत्याकांड में आरोपी शिक्षक को झटका, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज

हेड कांस्टेबल अजय पंवार हत्याकांड में आरोपी शिक्षक को झटका, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
हेड कांस्टेबल अजय पंवार की हत्या के मामले में आरोपी शिक्षक मोहित को बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) को तत्परता से दर्ज होना तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का एफआईआर से मेल खाना मानते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया।
मामला बागपत जनपद के थाना खेकड़ा क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार 29 जून की रात सुन्हेड़ा गांव निवासी हेड कांस्टेबल अजय पंवार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी ज्योति द्वारा 30 जून को खेकड़ा कोतवाली में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। रिपोर्ट में बताया गया कि आरोपी शिक्षक मोहित ने गाली-गलौज के बाद अजय पंवार पर गोली चलाई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शिक्षक मोहित और मृतक हेड कांस्टेबल अजय पंवार के बीच पूर्व से क्रिकेट मैच को लेकर विवाद चला आ रहा था, जिसके चलते दोनों के बीच रंजिश बनी हुई थी। घटना के बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देता हुआ मौके से फरार हो गया था। बाद में पुलिस ने उसे मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें गोली की दूरी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को आधार बनाकर राहत की मांग की गई। वहीं राज्य सरकार व वादी पक्ष की ओर से इसका कड़ा विरोध किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि मामला गंभीर प्रकृति का है, एफआईआर व पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई विरोधाभास नहीं है, इसलिए आरोपी जमानत का हकदार नहीं है। माननीय न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने जमानत याचिका को निरस्त करते हुए निचली अदालत को निर्देश दिए कि मामले का निस्तारण यथाशीघ्र किया जाए, ताकि पीड़ित पक्ष को समय पर न्याय मिल सके।