अंडमान-निकोबार प्रशासन ने दिया खेकड़ा की बेटी नीरा आर्य को बड़ा सम्मान
आजाद हिंद फौज की वीर सैनानी और खेकड़ा की बेटी नीरा आर्य की गाथा को अंडमान-निकोबार प्रशासन ने ऐतिहासिक सम्मान दिया है। उनकी आत्मकथा ‘मेरा जीवन संघर्ष’ को अब वहां के सभी स्कूल पुस्तकालयों में शामिल किया गया है, ताकि छात्र-छात्राएं देश पर बलिदान देने वाली इस वीरांगना के संघर्षपूर्ण इतिहास से परिचित हो सकें।
अंडमान-निकोबार प्रशासन ने दिया खेकड़ा की बेटी नीरा आर्य को बड़ा सम्मान
- स्कूल पुस्तकालयों में शामिल हुई आत्मकथा ‘मेरा जीवन संघर्ष’
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
आजाद हिंद फौज की वीर सैनानी और खेकड़ा की बेटी नीरा आर्य की गाथा को अंडमान-निकोबार प्रशासन ने ऐतिहासिक सम्मान दिया है। उनकी आत्मकथा ‘मेरा जीवन संघर्ष’ को अब वहां के सभी स्कूल पुस्तकालयों में शामिल किया गया है, ताकि छात्र-छात्राएं देश पर बलिदान देने वाली इस वीरांगना के संघर्षपूर्ण इतिहास से परिचित हो सकें।
महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नीरा आर्य ने काला पानी जेल में अमानवीय यातनाएं झेलने के बावजूद देश के प्रति अपना संघर्ष जारी रखा था। अब उनकी ही जन्मभूमि खेकड़ा के लिए गौरव का क्षण है कि अंडमान-निकोबार के छात्र उनकी जीवनी से प्रेरणा लेंगे। अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के शिक्षा निदेशालय ने उनकी आत्मकथा को छात्रों और स्थानीय लोगों तक उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। कस्बे के नीरा आर्य स्मारक पुस्तकालय के संस्थापक साहित्यकार तेजपाल आर्य ने बताया कि शिक्षा निदेशालय ने पुस्तक की खरीद के लिए प्रकाशकों को आदेश जारी कर दिए हैं। दिल्ली स्थित डीके पब्लिकेशन को भी आत्मकथा की आपूर्ति का ऑर्डर मिला है। तेजपाल आर्य का कहना है कि अंततः काला पानी प्रशासन ने नीरा आर्य के अप्रतिम बलिदान और योगदान को स्वीकारते हुए उनकी आत्मकथा को प्रेरणादायक ग्रंथ माना है। यही कारण है कि इसे अब द्वीप समूह के स्कूलों और पुस्तकालयों में उपलब्ध कराया जा रहा है। नीरा आर्य की आत्मकथा अंडमान-निकोबार के छात्रों में देशभक्ति, साहस और संघर्ष की भावना जगाने का एक नया अध्याय साबित होगी।