नीरा आर्य की वीरगाथा पाठ्यक्रम में शामिल करे भारत सरकार’
आजाद हिंद फौज की रानी झांसी रेजीमेंट की वीरांगना और पहली महिला जासूस नीरा आर्य की पुण्यतिथि पर रविवार को खेकड़ा में देशभक्ति और भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। नीरा आर्य को श्रद्धांजलि देने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री राजश्री चौधरी, आजाद हिंद फौज के 102 वर्षीय वयोवृद्ध सेनानी लेफ्टिनेंट आर. माधवन पिल्लई और शहीद सुखदेव के पौत्र अनुज थापर समेत शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के वंशज जुटे।
नीरा आर्य की वीरगाथा पाठ्यक्रम में शामिल करे भारत सरकार’
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री राजश्री चौधरी ने उठाई मांग, पुण्यतिथि पर शहीदों के वंशजों ने वीरांगना को दी श्रद्धांजलि
- आईएनए के 102 वर्षीय वयोवृद्ध सेनानी लेफ्टिनेंट आर. माधवन पिल्लई और शहीद सुखदेव के पौत्र अनुज थापर भी पहुंचे
- एक दर्जन से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के वंशज सम्मानित
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
आजाद हिंद फौज की रानी झांसी रेजीमेंट की वीरांगना और पहली महिला जासूस नीरा आर्य की पुण्यतिथि पर रविवार को खेकड़ा में देशभक्ति और भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। नीरा आर्य को श्रद्धांजलि देने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री राजश्री चौधरी, आजाद हिंद फौज के 102 वर्षीय वयोवृद्ध सेनानी लेफ्टिनेंट आर. माधवन पिल्लई और शहीद सुखदेव के पौत्र अनुज थापर समेत शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के वंशज जुटे।
साहित्यकार तेजपाल सिंह और मधु धामा द्वारा स्थापित नीरा आर्य स्मारक पुस्तकालय परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में राजश्री चौधरी ने भारत सरकार से नीरा आर्य की जीवनगाथा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नीरा आर्य ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अपने ही पति का सामना किया और देश की आजादी के लिए अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि आजाद हिंद फौज का देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। नीरा आर्य जैसी वीरांगनाओं का बलिदान और साहस देश की युवा पीढ़ी तक पहुंचना चाहिए। उनकी वीरगाथा को पाठ्यक्रम में शामिल करने से बच्चों को देशभक्ति, साहस और त्याग की प्रेरणा मिलेगी।
102 वर्षीय सेनानी ने गुनगुनाया ‘कदम-कदम बढ़ाए जा’
आजाद हिंद फौज के 102 वर्षीय वयोवृद्ध सेनानी लेफ्टिनेंट आर. माधवन पिल्लई ने नीरा आर्य को श्रद्धांजलि देते हुए ‘कदम-कदम बढ़ाए जा’ गीत गुनगुनाया। उन्होंने नीरा आर्य को बीती सदी की सबसे बहादुर वीरांगनाओं में से एक बताया। उनके संबोधन और गीत ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। शहीद भगत सिंह के साथ फांसी का फंदा चूमने वाले अमर बलिदानी सुखदेव के पौत्र अनुज थापर ने कहा कि देश की आजादी के लिए नीरा आर्य का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि देश की नई पीढ़ी को ऐसे वीर-वीरांगनाओं के संघर्ष और बलिदान से परिचित कराना जरूरी है।
नीरा आर्य के नाम पर होगा सार्वजनिक स्थल का नामकरण
नगरपालिका चेयरपर्सन नीलम धामा ने नीरा आर्य के नाम पर किसी सार्वजनिक स्थल का नामकरण कराने का आश्वासन दिया। इस दौरान स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के वंशजों को सम्मानित किया गया। इनमें चौधरी बदन सिंह तोमर के परपौत्र तेजपाल सिंह तोमर, स्वतंत्रता सेनानी चौधरी मुरारी लाल के पौत्र डॉ. राघवेंद्र चौधरी और 1857 की क्रांति के योद्धा मिठ्ठनलाल बली वाले के परपौत्र प्रदीप बली समेत अनेक लोग शामिल रहे। कवि गजेंद्र गजानन, कवि इकबाल बड़ौत और कैप्टन नरेंद्र छाबड़िया सरधना ने देशभक्ति से ओतप्रोत मार्मिक कविताएं सुनाकर माहौल को भावुक बना दिया। संचालन शहीद सम्मान अभियान के संयोजक डॉ. हरपाल सिंह जटराणा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. जगपाल सिंह तेवतिया, डॉ. महक सिंह बड़ौत, लोकेश शर्मा, मनोज जैन, डॉ. राघवेंद्र तेवतिया, भोपाल सिंह, ब्राह्मण समाज खाप चौधरी नरेश शर्मा, रामकुमार धामा, संजय शर्मा, अमित धामा, विष्णु शर्मा, कपिल डांगी, चंद्रपाल सिसौली, हर्ष शर्मा, नितिन धामा, हरवीर धामा, योगेश शर्मा, अमरपाल धामा सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

