5 साल में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के खिलाड़ियों ने नहीं बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के स्टेडियमों में खेल के बदले हो रही शादियां

5 साल में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के खिलाड़ियों ने नहीं बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

विनय जोशी

एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का वर्चस्व काफी ज्यादा बेहतर रहा। हालांकि, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के स्टेडियमों में महंगी खेल फीस होने के बाद भी अब तक ज्यादा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान नहीं बना सके हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान नहीं होने के चलते अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के स्टेडियमों पर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के इन स्टेडियमों में 50 से ज्यादा अकादमी होने के बाद भी पांच साल के संचालन के बाद भी एक पदक गौतमबुद्ध नगर को प्राप्त नहीं हो सका है।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में करोड़ों रुपये की लागत से स्टेडियम तैयार किया गया है। इन स्टेडियमों के माध्यम से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना सके। इन स्टेडियमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधा देने के लिए तैयार किया गया था। हालांकि, इन स्टेडियमों की फीस काफी ज्यादा होने के चलते प्रत्येक बच्चे तक खेल सुविधाएं पहुंचना संभव नहीं है।

महंगी फीस होने के चलते आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे नहीं आते

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के स्टेडियमों की काफी ज्यादा महंगी फीस होने के चलते आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे इन स्टेडियों में होने वाली नियमित प्रशिक्षण का लाभ नहीं उठा सकते हैं। निजी अकादमियों के लिए यही स्टेडियम और खेल सुविधाएं कमाई का एक माध्यम बनता जा रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के इन स्टेडियमों में बच्चों के आभाव के चलते एशियन गेम्स और ओलंपिक समेत कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गौतमबुद्ध नगर का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाते हैं।

पांच साल में अब तक गौतमबुद्ध नगर को नहीं प्राप्त हुआ कोई मेडल

एशियन गेम्स और ओलंपिक समेत कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पिछले पांच सालों के भीतर एक भी मेडल गौतमबुद्ध नगर को प्राप्त नहीं हो सका है। जबकि नोएडा और ग्रेट नोएडा के इन स्टेडियमों में 50 से ज्यादा अकादमी संचालित हो रही है। मिली जानकारी के मुताबिक, बच्चों की तरफ से आरोप लगाए गए हैं कि कई खेलों में प्रशिक्षण की फीस काफी ज्यादा होने के चलते सामान्य परिवार के बच्चे प्रशिक्षण नहीं ले पाते हैं।

स्टेडियम में खेल से ज्यादा शादियों को दी जाती है जगह

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के स्टेडियमों में खेल गतिविधियों के अलावा कई आयोजनों और शादियों को जगह दी जाती है। इन आयोजनों और शादियों के चलते अक्सर खेल गतिविधियां भी काफी ज्यादा प्रभावित होती है। ऐसे में यह एक बड़ा सवाल बनता है कि इन आयोजनों और शादियों के चलते किस प्रकार से गौतमबुद्ध नगर को एशियन गेम्स और ओलंपिक में पदक प्राप्त हो सकेगा।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में खेलों की फीस

  • तीरंदागी 6000 रुपये प्रतिमाह
  • बास्केटबॉल और फुटबॉल 4500 रुपये प्रतिमाह
  • तैराकी 8000 रुपये प्रति माह
  • तलवारबाजी 12000 रुपये प्रति माह
  • लॉन टेनिस 6000 रुपये प्रतिमाह
  • बैडमिंटन 6000 रुपये प्रति माह
  • टेबल टेनिस 5000 रुपये प्रति माह
  • एथलेटिक्स 6000 रुपये प्रति माह
  • शूटिंग 15000 रुपये प्रति माह