एक माह कोविड ड्यूटी करने वालों को भी मिले नियुक्ति का लाभ

कोविड महामारी के दौरान जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले कर्मियों के समायोजन की शासन की घोषणा के बाद अब 90 दिन की अनिवार्य सेवा अवधि का पेंच फंस गया है। शासनादेश में कम से कम तीन माह यानी 90 दिन कोविड ड्यूटी करने वाले कर्मियों को ही समायोजन और वरीयता अंक का लाभ देने की व्यवस्था की गई है। इससे 30 से 60 दिन तक सेवा देने वाले कर्मियों में नाराजगी है। उन्होंने न्यूनतम सेवा अवधि घटाकर 30 दिन करने की मांग उठाई है।

एक माह कोविड ड्यूटी करने वालों को भी मिले नियुक्ति का लाभ

एक माह कोविड ड्यूटी करने वालों को भी मिले नियुक्ति का लाभ
- 90 दिन की अनिवार्य शर्त पर भड़का आक्रोश, कर्मियों ने शासन से नियम में छूट देने की उठाई मांग
बागपत, तेजस न्यूज रिपोर्टर
कोविड महामारी के दौरान जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले कर्मियों के समायोजन की शासन की घोषणा के बाद अब 90 दिन की अनिवार्य सेवा अवधि का पेंच फंस गया है। शासनादेश में कम से कम तीन माह यानी 90 दिन कोविड ड्यूटी करने वाले कर्मियों को ही समायोजन और वरीयता अंक का लाभ देने की व्यवस्था की गई है। इससे 30 से 60 दिन तक सेवा देने वाले कर्मियों में नाराजगी है। उन्होंने न्यूनतम सेवा अवधि घटाकर 30 दिन करने की मांग उठाई है।
उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कोविड-19 महामारी के दौरान सेवाएं देने वाले अस्थायी, संविदा और आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों को दोबारा सेवा में लेने के संबंध में शासनादेश जारी किया है। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष की ओर से जारी दिशा-निर्देश में कोविड काल में रिक्त पदों के सापेक्ष हटाए गए अथवा सेवा में बचे आउटसोर्स और संविदा कर्मियों, चिकित्सकों तथा पैरामेडिकल स्टाफ को प्राथमिकता के आधार पर समायोजित करने की बात कही गई है।
90 दिन की शर्त बनी सबसे बड़ी बाधा
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि पुनः कार्य समायोजन अथवा वरीयता अंकों का लाभ उन्हीं कोविड कर्मियों को मिलेगा, जिन्होंने महामारी के दौरान कम से कम तीन माह यानी 90 दिन सेवा दी हो। पात्र कर्मियों को अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष की अतिरिक्त छूट भी दी जाएगी। जिले में पद उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में मंडलायुक्त के माध्यम से मंडल के दूसरे जिलों में रिक्त पदों पर समायोजन का प्रावधान है।
‘संक्रमण का खतरा सबके लिए बराबर था’
शासन की इस व्यवस्था से 30 से 60 दिन तक सेवा देने वाले कर्मियों में रोष है। उनका कहना है कि कोविड की भयावह लहर के दौरान एक माह ड्यूटी करने वाले कर्मचारी ने भी उसी संक्रमण के खतरे के बीच काम किया, जिस खतरे का सामना छह माह सेवा देने वाले कर्मी ने किया। कई कर्मचारियों की तैनाती परिस्थितियों के अनुसार महज एक-दो माह के लिए की गई थी। ऐसे में अब 90 दिन की शर्त लगाना उनके साथ अन्याय है। कर्मियों ने शासन से मांग की है कि 90 दिन की अनिवार्य सेवा अवधि को घटाकर 30 दिन किया जाए और कम से कम एक माह कोविड ड्यूटी करने वाले सभी स्वास्थ्य कर्मियों का सत्यापन कर उन्हें भी समायोजन तथा मानदेय का अवसर दिया जाए। शासन ने सभी जिलों के अधिकारियों को 15 दिन के भीतर समायोजन की अद्यतन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में कोविड कर्मियों की नजर अब शासन के अगले फैसले पर टिकी है।