उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना से आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग का संकल्प
दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिनों में शुक्रवार को खेकड़ा कस्बे के छोटा बाजार स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना कर आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। भगवान शांतिनाथ की नित्य नियम पूजा के बाद इंद्रध्वज महामंडल विधान का आयोजन हुआ। विधान के पुण्यार्जक सूर्य प्रकाश जैन और अक्षय जैन रहे।
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना से आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग का संकल्प
- दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन जैन मंदिरों में गूंजे भक्ति और आराधना के स्वर
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिनों में शुक्रवार को कस्बे के छोटा बाजार स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना कर आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। भगवान शांतिनाथ की नित्य नियम पूजा के बाद इंद्रध्वज महामंडल विधान का आयोजन हुआ। विधान के पुण्यार्जक सूर्य प्रकाश जैन और अक्षय जैन रहे।
श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ की 108 दीपों से विशेष पूजा कर अर्घ्य समर्पित किए। पंडित राजेश राज ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि अपनी आत्मा को छोड़कर पर-पदार्थों में रमण नहीं करना ही सच्चा ब्रह्मचर्य है। ब्रह्मचर्य का पालन करने से आत्मबल और तेज बढ़ता है तथा व्यक्ति मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होता है। इसके बाद भक्तामर दीपार्चना हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने 48 अर्घ्य अर्पित कर भगवान शांतिनाथ की आराधना की। इस दौरान समाज के प्रधान नितिन जैन, सुमेर जैन, मनोज जैन, सतीश चंद जैन, कमल जैन, आर्जव जैन, अंकुश जैन और साहिल जैन मौजूद रहे। वहीं बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में भी उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ को 64 अर्घ्य अर्पित कर सुख-शांति और आत्मकल्याण की कामना की। इस दौरान त्रिलोकचंद जैन, संजीव जैन, राजीव जैन, प्रदीप जैन, सुनील जैन और अंकित जैन मौजूद रहे। भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में ब्रह्मचारी आशु जैन के सानिध्य में विधान हुआ। श्रद्धालुओं ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा कर भगवान की आराधना की। विधान में नितिन जैन, प्रवीन जैन, नरेश जैन, वीरेंद्र जैन और मधु जैन मौजूद रहे।