गांधी-शास्त्री जयंती पर काव्य रचनाओं से गूंजा त्याग और अहिंसा का संदेश
खेकड़ा कस्बे में गांधी-शास्त्री जयंती के अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के त्याग, सादगी, देशप्रेम और बलिदान को याद किया। रचनाओं में वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों की झलक भी दिखाई दी।
गांधी-शास्त्री जयंती पर काव्य रचनाओं से गूंजा त्याग और अहिंसा का संदेश
खेकड़ा, तेजस न्यूज रिपोर्टर
कस्बे में गांधी-शास्त्री जयंती के अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के त्याग, सादगी, देशप्रेम और बलिदान को याद किया। रचनाओं में वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों की झलक भी दिखाई दी।
काव्य गोष्ठी का संचालन कवि कश्यप राजेश राज ने किया। उन्होंने अपनी रचना में गांधी जी के स्वच्छता और स्वदेशी के सपने को याद करते हुए कहा, ष्गांधी जी का सपना तो देश को स्वच्छ बनाना था, शांति दूत बनकर के देश आजाद करना था।ष् उन्होंने चरखे और स्वदेशी के माध्यम से जनजागरण का संदेश भी प्रस्तुत किया। कवि शिव बहादुर बिंद ने बापू के प्रति देशवासियों की श्रद्धा को रचना के माध्यम से व्यक्त किया। कवि गजेंद्र कौशिक गजानन ने अपनी रचना में अहिंसा और वर्तमान समय में बढ़ती हिंसा के बीच के विरोधाभास को उठाया। उन्होंने गांधी जी के विचारों को वर्तमान परिस्थितियों में प्रासंगिक बताते हुए कई सवाल भी कविता के माध्यम से सामने रखे। कवयित्री वैशाली कौशिक ने जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व पर केंद्रित रचना प्रस्तुत की। उनकी पंक्तियों में शास्त्री जी के सरल व्यक्तित्व, देशसेवा और विशिष्ट पहचान को रेखांकित किया गया। काव्य पाठ के दौरान श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं की सराहना की। इस अवसर पर मयंक कौशिक, अर्चना बाथम, आराध्या बाथम आदि मौजूद रहे।
